राजस्थान के भानगढ़ किले का खौफनाक रहस्य: डर से कांप उठेंगे आप!

पुराने किलों, मौत, हादसों, अतीत और रहस्यों का एक अलग ही इतिहास होता है। ऐसी जगहों पर जहां मौत साया बनकर घूमती हो, इंसान का जाना मौत को निमंत्रण देने जैसा हो सकता है। जिनके बारे में कोई अंदाजा भी नहीं होता है। कुछ लोगों को कुछ अद्भुत चीजें देखने को मिलती हैं और कुछ को नहीं।

आज मैं एक ऐसे किले के बारे में बात करने जा रहा हूं जो आपने सुना तो होगा, पर क्या वो सच है? आइये जानते हैं। दुनिया भर में अनेकों ऐसे किले और राजमहल हैं जिनका अपना एक अलग ही रहस्य है। उस तरह आज हम भानगढ़ के भुतिया किले के बारे में बात करते हैं।

भानगढ़ किले का इतिहास

भानगढ़ के किले को मान सिंह के छोटे भाई माधो सिंह ने बनवाया था। यह किला 17वीं शताब्दी में बनवाया गया था। राजा माधो सिंह उस समय अकबर की सेना में जनरल के पद पर तैनात थे। 10,000 जनसंख्या वाला यह शहर माधो सिंह के अंतर्गत था।

भानगढ़ का किला अलवर जिले में स्थित एक शानदार किला है जो कि बहुत ही विशाल आकार में फैला हुआ है। चारों तरफ से पहाड़ों से घिरे इस किले को बेहतरीन शिल्पकारों ने बनाया है। इसके अलावा, इस किले में भगवान शिव और हनुमान जी के प्राचीन मंदिर भी स्थित हैं।

Bhangarh Fort Temple
भानगढ़ किले में भगवान शिव और हनुमान जी के प्राचीन मंदिर भी स्थित हैं।

इस किले में 5 दरवाजे हैं, और एक मुख्य दरवाजा है। इस किले में मजबूत पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जो कि इतने सालों से आज भी वैसे ही टिका हुआ है।

भानगढ़ किले का डरावना रहस्य

भानगढ़ का किला, राजस्थान के अरावली पहाड़ों में स्थित अपनी भव्यता और रहस्यमय कहानियों के लिए जाना जाता है। यह किला 17वीं शताब्दी में राजा सवाई माधो सिंह द्वारा बनवाया गया था, और अपनी स्थापना के बाद से ही अनेक अजीब घटनाओं का गवाह रहा है।

किले से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कहानी राजकुमारी रत्नावती और जादूगर सिंधिया की है। कहा जाता है कि राजकुमारी रत्नावती अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थीं और कई राजकुमार उनसे विवाह करना चाहते थे। एक दिन, राजकुमारी बाजार में इत्र खरीदने गईं, जहाँ उनकी नज़र सिंधिया पर पड़ी जो काले जादू में माहिर था। सिंधिया राजकुमारी पर मोहित हो गया और उसने उन्हें मोहित करने के लिए एक वशीकरण युक्त इत्र का बोतल भेंट किया।

राजकुमारी रत्नावती के सेवक ने सिंधिया को यह सब करते हुए देख लिया। और फिर रत्नावती ने बोतल को पत्थर पर पटककर इत्र गिरा दिया, उन्होंने अपने सैनिकों से उस पत्थर को जादूगर के उपर लुढ़का दिया जिससे उसी समय जादूगर का मौत हो गई। मरते समय उसने श्राप दिया कि इस किले के सारे लोग मर जायेंगे और फिर दुबारा कभी जन्म नही ले पाएंगे। उसी समय अजबगढ और भानगढ के बीच युद्ध हो जाता है, और सारे लोग उसी महल मे मारे जाते है। राजकुमारी रत्नवति भी उस तंत्रिक के श्राप से बच नहीं पाई और वो भी मारी जाती है।

तब से वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही सैनिकों के चलने और स्त्रियों के रोने की आवाजें सुनाई देती हैं। यह किला अब खंडहर में बदल चुका है।

भानगढ़ किले का डरावना रहस्य
भानगढ़ किले का डरावना रहस्य

इस किले से जुड़ी एक और कहानी बहुत प्रचलित है। कहा जाता है कि जब इस महल का निर्माण हो रहा था, तब गुरु बालुनाथ ने राजा को चेतावनी दी थी कि महल की ऊंचाई इतनी न रखें कि उनकी समाधि पर छाया पड़ जाए।

लेकिन राजा ने उनकी बात अनसुनी कर दी। नाराज गुरु ने श्राप दिया, जिससे किला भूतिया हो गया।

कई पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि भानगढ़ किला वास्तव में भूतिया नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से ही रहस्यों से भरा रहा है। यहाँ किए गए उत्खननों में अनेक प्राचीन अवशेष मिले हैं, जो इस क्षेत्र के समृद्ध इतिहास की गवाही देते हैं। आज भानगढ़ किला भारत सरकार के अधीन है और पर्यटकों के लिए खुला है। हालांकि, सूर्यास्त के बाद किले में प्रवेश निषिद्ध है।

भानगढ़ किला अपनी भव्यता, रहस्यमय कहानियों और अजीब घटनाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह निश्चित रूप से उन लोगों के लिए एक आकर्षक स्थान है जो इतिहास, रहस्य और रोमांच में रुचि रखते हैं।

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अभिषेक प्रताप सिंह

अभिषेक प्रताप सिंह

राम-राम सभी को मेरा नाम अभिषेक प्रताप सिंह हैं, मैं मध्य प्रदेश का रहना वाला हूँ। हिन्दीअस्त्र पर मेरी भूमिका आप सभी तक ज्ञानवान और मजेदार आर्टिकल पहुंचाना है, ताकि आपको हर दिन नई जानकारी प्राप्त हो सके।

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